पेट्रोल पंप मालिकों का दर्द

 पेट्रोल पंप मालिकों का दर्द


 मेरे प्यारे मित्रों आज मैं इस ब्लॉक के माध्यम से आप सभी लोगों को पेट्रोल पंप मालिकों के दर्द के बारे में बताना चाहूंगा क्योंकि जो इस पेट्रोल पंप के व्यापार में है और व्यापार कर रहा है उसी को उसके जीवन में आने वाली कठिनाइयां और परेशानियों के बारे में पता होता है आम जनता या आम लोगों को नहीं पता होता लेकिन आज मैं इस ब्लॉग के माध्यम से इस दर्द को आप सभी लोगों तक पहुंचाने का कोशिश कर रहा हूं कि शायद आप भी समझ पाए की सभी पेट्रोल पंप मालिक चोर नहीं होते और ना ही वह चोरी करना चाहते हैं इन सब के पीछे होती हैं हमारी देश की कंपनियां ही जैसे इंडियन ऑयल बीपीसी एचपीसी यह पेट्रोल पंप स्वामी को एक कठपुतली की तरह यूज करते हैं क्योंकि वह इन कंपनियों पर डीलर होता है उसे इन कंपनियों की सारी नियम और शर्तें माननी होती हैं



पेट्रोल पंप मालिक चोर नहीं होते होती हैं यह कंपनियां तो जबरन कराती हैं पेट्रोल पंप मालिक से यह अपराध जानेंगे कैसे

दोस्तों मैं बताना चाहूंगा कि तेल के इस खेल में सबसे बड़ा चोर यदि कोई है तो पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़ी यह कंपनियां क्योंकि यह कंपनियां ही पेट्रोल पंप मालिक को चोर बनने पर मजबूर करती हैं क्योंकि यह कभी पेट्रोल पंप मालिक को डीजल या पेट्रोल पूरा नहीं देती हैं पेट्रोलियम कंपनियां खुद तो पेट्रोल पंप पर एक एक बूंद डीजल पेट्रोल ग्राहक को पूरा दिलाते हैं और सरकारें भी डीलरों पर हर समय शिकंजा कसती रहती हैं और उनके अधिकारी समय-समय पर चेकिंग कर कर डीलर का खून पीते रहते हैं और उसे समय-समय पर विभिन्न विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना देते रहते हैं जैसे कि क्षेत्र के अधिकारी पेट्रोल पंप पर समय-समय पर अपनी गुंडागर्दी से फ्री में डीजल लेते रहते है  अगर पेट्रोल पंप मालिक ना भरे तो उसे चेकिंग में डीजल पेट्रोल कम देने के आरोप में बंद करने की धमकी देते रहते हैं और कई पेट्रोल पंपों को बंद भी कर देते हैं 
 जबकि बड़ी तेल कंपनियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं करता है और आंखें मूंद कर देखते रहते हैं सच मानो तो हमें इन कंपनियों पर कड़ी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि यह डीलर को माल ही पूरा नहीं देती तो डीलर अपने पेट्रोल पंप पर माल कहां से पूरा करेगा और किस तरीके से बूंद-बूंद कर कर पूरा माल बेचे 

नंबर 1 तेल कंपनियां कोई भी पेट्रोल पंप मालिक को मालपुरा नहीं देती यह जिस टैंकर से माल भेजती हैं उस 12000 लीटर टैंकर में कम से कम 100 लीटर माल काम आता है जिससे डीलर को जबरन पूरा बता कर रिसीव करना पड़ता है

नंबर 2 जिस टैंकर से माल आता है उस टैंकर का कैलिब्रेशन या नापतोल कभी भी डिजिटल मशीनों द्वारा नहीं की जाती 

नंबर 3 जब डीलर को डिपो से माल मिलना होता है तो माल मिलने से पहले डिपो मैनेजर उस माल का डीजल हो या पेट्रोल उसका टेंपरेचर बढ़ा देते हैं और जब टेंपरेचर बढ़ जाता है तब उस माल को टैंकरों में भरकर पेट्रोल पंप पर पहुंचा दिया जाता है आपको बताना चाहूंगा जब कोई माल गर्म होगा तो उस टैंकर में ओवर बताएगा लेकिन जब वही माल टैंक में उतरने के बाद ठंडा हो जाता है तो फिर वह माल टैंक में कम हो जाता है इस तरीके से पेट्रोल पंप पर पेट्रोल पंप मालिकों के टैंक में माल कम हो जाता है और वह कभी पूरा नहीं होता अब डिपो मैनेजर या डिपो के कर्मचारी यह इसीलिए करते हैं क्योंकि जब गरम माल होता है तो टैंकर में सौ 100 लीटर कम दिया जाता है और यही माल खट्टा कर कर बाद में यह डिपो मैनेजर टैंकरों के टैंकर माल काला बाजार क्षेत्र में बेच देते हैं और मोटी कमाई करते हैं इस मोटी कमाई का हिस्सा पेट्रोलियम मंत्री एवं पेट्रोल एम से संबंधित सभी अधिकारियों को बराबर बराबर जाता है


नंबर 4 यदि पेट्रोलियम कंपनियां चोर नहीं है और माल कम नहीं देती हैं तो क्यों नहीं पेट्रोल पंप पर जिस तरीके से पेट्रोल बेचने के लिए मशीन लगाई जाती है और वह पूरा माल ग्राहकों तक पहुंचाते हैं तो पेट्रोल पंप पर माल रिसीव करने के लिए डिस्पेंसर यूनिट या नापने के लिए मशीन क्यों नहीं लगाई जाती उन्हें क्यों डंडे से या कहूं डीप रोड से माल नाप कर क्यों दिया जाता है जिससे यह पता ही नहीं चलता की टैंकर में कितना माल कमाया है और माल की सही आपूर्ति नहीं पता चलती आप ही लोग बताएं की जब पेट्रोल पंप मालिक को माल ही पूरा नहीं मिलेगा तो वह ग्राहकों को कहां से पूरा करके दे और देता भी है तो जितना पैसा सर पूरी गाड़ी की कमीशन में नहीं मिलता उससे ज्यादा उसका माल कम हो जाता है आप ही लोग बताओ पेट्रोल पंप मालिक क्या करें

नंबर 5 पेट्रोलियम कंपनियां इतनी बड़ी चोर है की उनके पेट्रोल पंप पर लगा ऑटोमेशन उनका है सहारा सॉफ्टवेयर उनका है फिर भी जब टैंकर माल लेकर आता है और वह टैंक में उतरता है तो उनका ऑटोमेशन जब माल कम बताता है तो वह उतने ही माल के पैसे क्यों नहीं लेती हैं क्यों पेट्रोल पंप स्वामी से पूरे 12000 लीटर के पैसे वसूले जाते हैं जब सॉफ्टवेयर उनका मोनेटाइजेशन उनका मशीनें मॉनिटर शन से जुड़ी हुई उनकी जब सब चीज उनकी है तो वह माल के पूरे पैसे क्यों लेती हैं जितना टैंक में माल उतारने के बाद बताता है उतने पैसे क्यों नहीं काटते

                                         Dr. Subhash Chandra

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